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Kena Upanishad PDF Download

Introduction 

Kena Upanishad PDF | केन उपनिषद PDF: यहाँ हमने केना उपनिषद की तीन पब्लिकेशन की बुक्स पीडीऍफ़ उपलब्ध करवायी है | 

जिसमे  Kena Upanishad in Hindi pdf गीताप्रेस और एक Kena Upanishad swami ChinmayaNanda pdf है जो संस्कृत श्लोक का इंग्लिश वर्णन किया गया है |

Kena Upanishad pdf by swami sharvanand जी की बुक है जो संस्कृत और इंग्लिश में है | 

तो आपको इस तीनो पुस्तकों में से जो भी अच्छी लगे वो पढ़ शकते है | 

॥ यच्चक्षुषा न पश्यति येन चक्षुमिसि पश्यति ।| 

- केन उपनिषद प्रथम खंड श्लोक ६

(जिसे वह उन आँखों से नहीं देखता जिन आँखों से वह देखता है)

Kena Upanishad PDF | केन उपनिषद PDF

kena upanishad pdf


केन उपनिषद का परिचय :

  • मांडूक्य उपनिषद सभी उपनिषदों में सबसे छोटा 12  छंदों का एक संग्रह है |
  • जो चेतना की प्रकृति और ब्रह्म के साथ आत्मा के संबंध का भी वर्णन करता है।
  • यह उपनिषद अथर्ववेद से संबंधित है |
  • मुक्तिका उपनिषद में दी गई 108 उपनिषदों की सूची में दूसरे स्थान पर इसका वर्णन किया गया है।
  • केन उपनिषद हिंदू धर्म के 11 मुख्य उपनिषदों में से एक है |
  • इसको पहेली सताब्दी ईसा पूर्व के आसपास लिखा गया है |
  • इस उपनिषद के कई श्लोक काफी प्राचीन है क्योंकी केन उपनिषद के २ श्लोक बृहदारण्यक उपनिषद के अध्याय ४.४  और छांदोग्य उपनिषद मे से भी लिए गई है |
  • यह दो उपनिषद काफी प्राचीन उपनिषदों में से एक है |
  • केन उपनिषद गुरु शिष्य में वार्तालाप के रूप में है |
  • केन उपनिषद में अनेक प्रश्न और उनके उत्तर है एक के बाद एक उत्तर के जानने की यात्रा है |
  • केन उपनिषद मुख्य उपनिषदों में से एक है केन उपनिषद में ब्रह्म की महिमा और उसके अव्यक्त स्वरूप का बोध कराते है |
  • ब्रह्म विद्या उच्च विद्या है जो विद्या से मोक्ष तुरंत प्राप्त होता है यह विद्या उन लोगों के लिए है |
  • जिन्होंने अपने मन और अपनी बुद्धि को संसार तथा सांसारिक वस्तुओं से हटा लिया है, जिन्होंने संसार को त्याग दिया है और जो ब्रह्म के ध्यान में ही लगे रहते हैं |
  • इसके विपरीत ईश्वर ज्ञान साधारण विद्या है जो विद्या मनुष्य को मुक्ति की राह पर डाल देती है |
  • जिसमें आखिरकार उसे मुक्ति मिल ही जाती है यह लंबा और धीमा रास्ता है |
  •  जिससे उपासक धीरे-धीरे उच्च विद्या को प्राप्त कर ब्रह्म को जान लेता है और तब उसे मुक्ति मिल जाती है |
  • केन उपनिषद से प्रभावित होकर डेविड स्टोलने शास्त्रीय संगीत में "सोनाटा फॉर पियानो " की रचना की थी |

इस उपनिषद का नाम केन क्यों पड़ा ?

  • इसका नाम इस ही उपनिषद के पहले संस्कृत श्लोक के पहले शब्द  केन से पड़ा है |
  • केन का अर्थ है कौन या किसके द्वारा, कहाँ से, कैसे, क्यों, किस कारण से, आदि। 

केन उपनिषद का दूसरा नाम क्या है?

  • केन उपनिषद को संस्कृत केनोपनिषद भी कहा जाता है |
  • यह उपनिषद सामवेद के तलवकार ब्राह्मणम का हिस्सा है जिसकी वजह से इसे तलवकार भी कहते हैं |

केन उपनिषद की संरचना 

 केन उपनिषद में तीन भाग हैं जिससे चार खंडो में विभाजित किया गया है |

  • जिसमे पहले दो भाग सर्वे ब्रह्म जो सृष्टि का मूल आधार है उसके बारे में है, और अंतिम दो भाग ब्रह्मा को ईश्वर के रूप में दर्शाते हैं |
  •  केन उपनिषद के प्रथम एवं द्वितीय खंड में गुरु और शिष्य के संवाद के माध्यम से उसे आश्रम में प्रेरक और सर्वोच्च सत्ता की इच्छाओं तथा उसकी अनुभूति के संबंध में आवश्यक तत्वों का विवेचन किया गया है |
  •  तीसरे और चौथे खंड में देवताओं के अभियान और अभिमान मर्दन के लिए यक्ष रूप में ब्रह्मा का प्रकट होकर अंतर ध्यान होने और तदन्तर विद्या देवी के द्वारा ब्रह्म तत्व का वर्णन है |
  • चतुर्थ खंड में ब्रह्म के स्वरूप को जानने के मार्ग और इस ज्ञान के फल स्वरुप मुक्ति प्राप्त कर लेने का सुंदर उल्लेख है | 

हमें केन उपनिषद क्यों पढ़ना चाहिए?

आत्मज्ञान प्राप्त करने के लिए :

  • यह उपनिषद पढ़ने से आत्मा की प्रकृति के बारे में जानेगे और आप आत्मज्ञान की तरफ बढ़ेंगे |
  • जिससे आपका मानवीय और आध्यात्मिक दृष्टिकोण समृद्ध होगा जिससे आपके जीवन में उच्च से लेकर सूक्ष्म के स्तर पर आत्मा को ब्रह्म के साथ जोड़ती है |
  • इसमें आप जानेगे की ब्रह्मांड सिर्फ एक माया है हमारी आत्मा ही वास्तविकता है |
  • जिससे हमारा जीवन सुधरेगा और मोक्ष प्राप्त करने मदद मिलेगी |

जीवन को सही दिशा देने में :

  • इसको पढ़ेंगे तो हमे अच्छे पाठ सीखने को मिलेंगे जिससे हमारी मानसिकता बदलेगी और नैतिक मूल्यों, उदेश्य की तरफ हमे मार्ग मिलेगा |
  • और हमे अहम नहीं करना चाहिए और दुसरो प्रति हमे सहानाभूति दिखानी चाहीये |
  • जिससे कहि ना कही हमे ही आत्मा संतुष्टि होगी और हमारा जीवन शांतिपूर्ण और आनंदमई होगा |

केन उपनिषद का निष्कर्ष क्या है?

  • केन उपनिषद हमें यह बताता है कि हम किसी वस्तु को कैसे समझते है |
  • आत्मा ही ब्रह्म है, वही पुरे ब्रह्मांड का सार है और सरव्यापी और सर्वशक्तिमान है |
  • और हमें सभी मनुष्य और प्राणीओं की तरफ मानवता का भाव रखना चाहिए और अहम् नहीं करना चाहिए |
  • इस उपनिषद का उद्देश्य हमें सार्वभौमिक शक्ति, चेतना, और  ब्रह्म की वास्तविकता की ओर ले जाना है |

Kena Upanishad swami ChinmayaNanda pdf इंग्लिश में है और गीता प्रेस की पीडीऍफ़ हिंदी में है |

अगर आपको केन उपनिषद के श्लोक का हिंदी में ट्रांसलेट के साथ उसपर एक्सप्लेनेशन भी चाहिए तो आप Kena Upanishad swami ChinmayaNanda pdf को पढ़ शकते है |

अगर आपको केन उपनिषद को हिंदी ही चाहिए संस्कृत श्लोक के हिंदी ट्रांसलेट के साथ तो आपके लिए गीता प्रेस की बुक पीडीऍफ़ ठीक रहेगी |


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