Mandukya Upanishad pdf | मांडूक्य उपनिषद पीडीएफ हमने इंटरनेट पर जितनी अच्छी किताबे थी माण्डूक्यउपनिषद के ऊपर उन सभी की डाउनलोड लिंक निचे दी गई हुई है |
इसमें २ किताबे इंग्लिश में और ३ किताबे हिंदी में है जिसके नाम निचे दिए गई है |
- The Mandukya Upanishad in Hindi pdf by Gita Press Gorakhpur
- The Mandukya Upanishad with Gaudapada's Commentary in Hindi pdf
- The Mandukya Upanishad by Swami Krishnananda in English pdf
- The Mandukya Upanishad with Gaudapada's Karika and Sankara's Commentary in English pdf
- The Mandukya Upanishad pdf in Hindi by Shripad Damodar Satvalekar
माण्डूक्य उपनिषद का परिचय :
- माण्डूक्य उपनिषद अथर्ववेद का हिस्सा है यह सभी उपनिषदों में यह सबसे छोटा और सबसे कठिन है |
- केवल सिर्फ 12 श्लोक होने के बावजूद यह सारी मानव चेतना के बारे में बताता है |
- मनुष्य की जागृत अवस्था से लेकर उसकी समाधि तक की अवस्था के बारे में बताता है और अंतर ज्ञान की व्यवस्था के बारे में भी बहुत ही अच्छी तरह का वर्णन किया गया है |
- आदि शंकर का मानना था कि यदि हमें सिर्फ एक ही उपनिषद पढ़ना हो तो वह माण्डूक्य उपनिषद होना चाहिए क्योंकि यह छोटा भी है और अध्यात्म ज्ञान के गहरे रहस्य को अच्छी तरह समजाता है |
माण्डूक्य उपनिषद को माण्डूक्य ही क्यों कहते है ?
- मांडूक्य शब्द मंडूक या मांडुक शब्द से बना है और इसमें मांडुक शब्द का अर्थ मेंढक या घोड़े की एक विशेष नस्ल, या, आध्यात्मिक कष्ट जैसे मीनिंग होता है और मंडूक शब्द का अर्थ एक वैदिक विद्यालय भी होता है |
- कही विद्वान यह भी कहते है की यह एक ह्रस्व माण्डुकेय नामक विद्धवान के नाम पर भी रखा गया होगा |
- ह्रस्व माण्डुकेय का उल्लेख ऋग्वेद के ऐतरेय आरण्यक में भी करी गई है |
माण्डूक्य उपनिषद कब लिखा गया ?
- इस उपनिषद का कालक्रम सटीक बताना तो बहुत मुश्किल है क्युकी इसमें बहुत से विद्वानों के मतभेद है |
- लेकिन हम कुछ पॉपुलर विद्धवानो की सुने तो सामान्य युग(कॉमन ऐरा ) की प्रारंभिक शताब्दियों में लिखा गया था |
- जापान के हिंदू और बौद्ध धर्मग्रंथों के विद्वान, हाजीमे नाकामुरा और दक्षिण एशियाई धर्मों के विद्वान, रिचर्ड ई. किंग का भी यही कहेना है की इसकी उत्पति लगभग पहली या दूसरी शताब्दी ईस्वी सन् के आसपास का समय कहा गया है |
- मैकमिलन इनसाइक्लोपीडिया ऑफ रिलिजन के लेखक महोनी का कहेना है की यह पांचवीं शताब्दी ईसा पूर्व के अंत और चौथी शताब्दी की शुरुआत के आसपास उत्पति हुई होगी |
- लेकिन छान्दोग्य उपनिषद और माण्डूक्य उपनिषद के कुछ कंटेंट में समानताएं है जैसे की छांदोग्य उपनिषद अध्याय 8.7 से 8.12 और माण्डूक्य उपनिषद दोनों में चेतना की चार अवस्थाओं पर चर्चा की गई है |
- और छान्दोग्य उपनिषद बहुत ही पुराने उपनिषदों में से एक है |
माण्डूक्य उपनिषद के लेखक कोन है ?
- मांडूक्य उपनिषद का सारा पाठ गौड़पदजी के द्वारा छठी शताब्दी ईस्वी लिखी गई मांडूक्य कारिका में शामिल है |
- तो पॉल ड्यूसेन,इसेवा सहित कुछ और विद्वानों का मानना है की यह उपनिषद गौड़पदजी द्वारा लिखी गई हो शक्ती है |
- लेकिन इसकी कोई ठोस साक्षी नहीं है की यह उन्ही के द्वारा लिखी गई हो |
माण्डूक्य उपनिषद में कितने मंत्र हैं?
- यह उपनिषद सबसे छोटा उपनिषदों मे से एक है जिसमे सिर्फ १२ श्लोक दिए गई है |
माण्डूक्य उपनिषद में आप क्या पढ़ेंगे ?
- मांडूक्य उपनिषद में ओम शब्द का काफी विस्तार से वर्णन किया गया है और ब्रह्म का प्रतीक सृष्टि का मूल और सार बताया गया है।
- आपको इसमें ओम् के तीन अक्षर (अ, उ, म) कैसे चेतना की तीन अवस्थाए जैसे की जाग्रत, स्वप्न, सुषुप्ति और तुरीय के बारे जानने को मिलेगा |
- ॐ ही ब्रह्म है और ब्रह्म ही आत्मा है। ऐसा क्यों कहा जाता है ये भी इसमें अच्छे से बताया गया है |
- इसमें आपको मोक्ष को कैसे प्राप्त करना है उसके बारे में भी कहा गया है |
मांडूक्य उपनिषद से जुड़े कुछ विवाद :
- हाजीमे नाकामुरा का कहेना है की यह उपनिषद महायान बौद्ध धर्म के शून्यता की अवधारणा से प्रभावित है क्यों की इसमें काफी सारे बौधिस्ट शब्द पाए गई है उदाहरण के लिए अद्रस्टा, अव्यवहार्य, अग्रह्य, प्रपंचोपसामा, अलक्षण आदि।
- रान्डेल कोलिन्स के कहे अनुसार महायान बौद्ध धर्म के प्रज्ञापरमित्रसूत्रों के कुछ वाक्यांश इस उपनिषद में पाए गई है |
- माइकल कॉमन्स और विदुशेखर जैसे विद्वानोंने भी यह बात को नोटिस किया है की प्रपनकोपासम जैसा शब्द किसी हिन्दू वैदिक कार्यो में यूज़ नहीं किया जाता था |
- लेकिन यह भी नही कह रहे है की माण्डूक्य उपनिषद बौद्ध धर्म से इन्स्पायर है |
- माइकल कॉमन्स ने यह निष्कर्ष निकाला है की महायान बोध धर्म के सूत्र जैसे लंकावतार सूत्र और बुद्ध-प्रकृति की अवधारणा हिन्दू वैदिक विचारो से कही ना कही प्रभावित हुवे होंगे |
- इसेवाका तो यह कहेना है की बोध धर्म और हिंदू धर्म की शिक्षा में काफी अंतर दीखता है |
- क्यों की इस माण्डूक्य उपनिषद में आत्मा और ब्रह्म के बारे में उल्लेख किया गया है लेकिन बौद्ध धर्म आत्मा को स्वीकार ही नहीं करता है |
- अगर बौद्ध धर्म की माने तो आत्मा है ही नहीं लेकिन इस माण्डूक्य उपनिषद और गौड़पद की पुस्तक माण्डूक्यकारिका में साफ़ व्याख्या किया है की आत्मा होती है |
श्री राम ने माण्डूक्य उपनिषद के बारे में क्या कहते है ?
- रामायण में भगवान श्री राम, हनुमान जी से कहते है की अगर किसी को मोक्ष प्राप्त करना है तो उन्हें माण्डूक्य उपनिषद अवश्य पढ़ना चाहिए |
- श्री राम ने माण्डूक्य उपनिषद को १०८ उपनिषदों में सबसे पहले रखा है |
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